7 पारियों के फ्लॉप शो से शुरुआत, 18 साल बाद 25 हजार रन, 577 विकेट के साथ लिया दम

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क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ी की जब भी बात होती है, तो डॉन ब्रैडमैन या सचिन तेंदुलकर या विव रिचर्ड्स जैसे दिग्गजों के नाम लिए जाते हैं. कोई शेन वॉ़र्न, मुथैया मुरलीधरन, जेम्स एंडरसन को ये दर्जा देता है. अगर ध्यान दें, तो इसमें कोई गलत भी नहीं है क्योंकि इन खिलाड़ियों ने ऐसे मकाम हासिल किए, जो कम ही खिलाड़ियों को मिले. लेकिन ये खिलाड़ी या तो सिर्फ बैटिंग में महान थे या बॉलिंग में. गिने-चुने ही ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें इन दोनों विधाओं में महारथ हासिल थी और उन्हें सही मायनों में महान क्रिकेटर माना जा सकता है. इनमें से एक हैं- जैक कैलिस.

साउथ अफ्रीका से निकले सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर जैक कैलिस को क्रिकेट इतिहास के महानतम खिलाड़ियों की श्रेणी में बेहिचक रखा जा सकता है. अगर किसी को इससे आपत्ति होती भी है, तो उसे इस बात से शायद ही आपत्ति हो कि कैलिस सबसे महान ऑलराउंडर थे. वैसे तो इस पर भी महान विंडीज ऑलराउंडर गैरी सोबर्स का दावा आता है, लेकिन कैलिस ने दोनों खेल के दोनों फॉर्मेट में श्रेष्ठता हासिल की थी. इन्हीं कैलिस का आज यानी 16 अक्टूबर को जन्मदिन है.

खराब शुरुआत, फिर मचाया कहर

1990 के दशक में साउथ अफ्रीका की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी हुई थी और इसके साथ ही कई बेहतरीन खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिला. इसी दशक में कुछ सालों बाद कैलिस की एंट्री हुई थी और एक बार टीम में आने के बाद वह लगातार 18 साल तक साउथ अफ्रीकी टीम की जान बने रहे. इस दौरान कैलिस ने बल्ले और गेंद से साउथ अफ्रीका के लिए वेस्टइंडीज से लेकर भारत और ऑस्ट्रेलिया तक कई मैच जीते, कई मैच बचाए और कई मैचों में अकेले संघर्ष किया. वहीं

हालांकि, कैलिस की शुरुआत बिल्कुल भी अच्छी नहीं रही थी और 1995 में टेस्ट डेब्यू के बाद शुरुआती 7 पारियों में वह एकदम फ्लॉप रहे थे. इस दौरान वह 6 पारियों में दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके और कुल 57 रन ही बना सके. इसके बावजूद उन्हें न सिर्फ टीम में बनाए रखा गया, बल्कि वनडे फॉर्मेट में भी मौका दिया गया. बस फिर धीरे-धीरे कैलिस ने इस भरोसे को सही साबित किया और ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में टेस्ट शतक जमाए.

2000 का पहला दशक कैलिस के नाम रहा और उन्होंने इस दौरान दोनों फॉर्मेट में गेंदबाजी और बल्लेबाजी में कमाल किया. 2004 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में कैलिस ने 4 शतक ठोके और कुछ विकेट भी चटकाए. इसी दौरान वनडे में भी 2 शतक उनके बल्ले से निकले थे. यही कारण था कि 2005 में उन्हें ICC क्रिकेटर ऑफ द इयर और आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द इयर चुना गया था.

कैलिस का शानदार करियर

कैलिस का करियर शुरू भले ही अच्छे अंदाज में नहीं हुआ था, लेकिन उन्होंने इसका अंत शानदार अंदाज में किया. 2013 में अपनी आखिरी टेस्ट पारी में कैलिस ने एक यादगार शतक जमाया. भारत के खिलाफ डरबन में उस शतक के साथ जैक कैलिस ने टेस्ट इतिहास के सबसे सफल बल्लेबाजों की लिस्ट में अपना नाम लिखवाकर करियर को विराम दिया. हालांकि, वह वनडे में 2014 तक खेलते रहे.

कैलिस ने साउथ अफ्रीका के लिए सबसे ज्यादा 166 टेस्ट खेले और 13289 रन बनाए जो सचिन तेंदुलकर और कुमार संगाकारा के बाद तीसरे सबसे ज्यादा रन हैं. साथ ही 292 विकेट भी खाते में आए. उनके नाम टेस्ट में सबसे ज्यादा 23 प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड हैं. वहीं 328 वनडे में 11579 रन और 273 विकेट, जबकि 25 टी20 में 666 रन और 12 विकेट हैं.

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