विराट कोहली से टेस्ट टीम की कप्तानी लेना गलत फैसला था, लेकिन इस फैसले की जिम्मेदारी लेगा कौन?

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इसे विराट कोहली की जिद कहिए, उस वक्त बोर्ड के अध्यक्ष रहे सौरव गांगुली की अकड़ कहिए, रोहित शर्मा का हाथ आए मौके को मना ना कर पाना कहिए, लेकिन अब तो मानना पड़ेगा कि विराट कोहली से टेस्ट टीम की कप्तानी लेना गलत फैसला था. आप अगर ये सोच रहे हैं कि आज करीब डेढ़ साल बाद सही या गलत पर बहस का क्या कोई फायदा है, तो इसका जवाब है- हां, फायदा है. बड़ा फायदा है. ये बड़ा सबक है कि जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर गलत होते हैं. ये बड़ा सबक है कि भले ही क्रिकेट फैंस का इन फैसलों से सीधे तौर पर कुछ लेना-देना नहीं है लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. ये सबक है कि जिद, अकड़, चाहत से कहीं ऊपर है टीम का हित.

टीम हित पर जब-जब आंच आती है तो बाद में हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. ऐसा ही वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के बाद होता दिख रहा है- टीम इंडिया के हाथ खाली हैं. आगे का रास्ता धुंधला है. जितने मुंह उतनी बातें हैं. और इस अफसोेस का गहरा साया है कि लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से टीम खाली हाथ लौटी है.

जनवरी 2022 में विराट कोहली ने टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ी थी. तब ऐसी चर्चा थी कि उन्हें लिमिटेड ओवर की कप्तानी छोड़ने को कहा गया था जिससे नाराज होकर उन्होंने टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी थी. विराट कोहली ने ट्विटर पर जो चिट्ठी डाली थी उसमें वो काफी ‘इमोशनल’ भी दिखे थे. इसके बाद एक ऐसी मीटिंग का जिक्र जमकर हुआ, जिसके हवाले से सौरव गांगुली ने कहा कि उन्होंने बतौर बोर्ड अध्यक्ष विराट कोहली को दोबारा सोचने के लिए कहा था. जबकि विराट कोहली ने ऐसी किसी भी बात से इंकार कर दिया. ये मुद्दा बड़ा बना. कोई ना कोई तो गलत कह रहा था- वो सौरव थे या विराट इस चर्चा पर हर किसी ने अपनी राय रखी.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अगर रोहित शर्मा को टेस्ट टीम की कप्तानी का ऑफर किया गया होगा तो वो क्यों ही मना करेंगे. भारतीय टीम की कप्तानी का सपना कौन नहीं देखता, रोहित शर्मा किसी से अलग नहीं हैं. लिहाजा उनका इस रोल के लिए मना ना कर पाना सबसे तार्किक लगता है. अगर कुछ ‘इललॉजिकल’ यानी अतार्किक है तो वो विराट की नाराजगी है या फिर दादा की अकड़. हाल ही में सौरव गांगुली ने एक इंटरव्यू में कहा था कि विराट कोहली ने क्यों कप्तानी छोड़ी इसकी वजह वो ही बता सकते हैं. हालांकि बाद में सौरव गांगुली को भी बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था.

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