चौकीदार के बेटे को एमएस धोनी ने कैसे बनाया टीम इंडिया का चैंपियन?

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महेंद्र सिंह धोनी को क्यों सबसे ख़ास कप्तान माना जाता है? सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने भारत के लिए वर्ल्ड कप और चैम्पियंस ट्रॉफी जैसे ख़िताब जीते हैं? या इसलिए कि उन्होंने IPL में चेन्नई को चार बार चैंपियन बनाया है और कई मैच जीते हैं? बेशक ये वजहें हैं जो उन्हें ख़ास बनाती हैं, लेकिन इसके अलावा भी एक बात है जो हर कप्तान में नहीं होती. ये है किसी खिलाड़ी की पहचान कर उसे चैंपियन क्रिकेटर में बदल देना. इसके दर्जनों उदाहरण हैं, जिनमें एक बड़ा नाम है-

पिछले क़रीब एक दशक से रवींद्र जडेजा टीम इंडिया का अहम हिस्सा बन चुके हैं और विश्व के शीर्ष ऑलराउंडर्स में उनकी गिनती होती है. अब आप सोच रहे होंगे कई अचानक जडेजा पर बात क्यों होने लगी? तो हुज़ूर इसकी वजह है आज का दिन यानी 6 दिसंबर. आज टीम इंडिया के इस रॉकस्टार का जन्मदिन है. वह 34 साल के ही गये हैं.

…तो क्रिकेटर नहीं बनते जडेजा

रवींद्र जडेजा आज क्रिकेट में एक बड़ा नाम हैं लेकिन अगर बचपन में उनके पिता की चलती तो वह कभी क्रिकेटर नहीं बन पाते. जामनगर के नवगाम घेड में जन्मे जडेजा के पिता अनिरुद्ध जडेजा एक सिक्योरिटी एजेंसी में चौकीदार थे और वो अपने बेटे को सेना में देखना चाहते थे. बेटे के सिर पर हालांकि क्रिकेट का भूत सवार था. हालांकि 2005 में मां के निधन के बाद रवींद्र जडेजा क्रिकेट छोड़ने को तैयार थे लेकिन उनकी बहन ने ऐसा नहीं होने दिया.

फिर 2008 के अंडर-19 विश्व कप में उन्हें शुरुआती पहचान दिलाई जहां कप्तान विराट कोहली के सेनापति (उप-कप्तान) के रूप में उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. सौराष्ट्र के इस बाएं हाथ के स्पिन-ऑलराउंडर ने जल्द ही घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और रणजी ट्रॉफी में बल्ले और गेंद से तहलका मचाया. इसी बीच 2008 के पहले इंडियन प्रीमियर लीग सीजन में राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाने में भी जडेजा की बड़ी भूमिका थी.

धोनी ने बनाया शागिर्द, कर दिया कमाल

इन सब प्रदर्शनों ने धोनी की कप्तानी में 2009 में जडेजा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने का मौका दिया. हालांकि, धोनी का असली असर दिखना शुरू हुआ 2012 में, जब चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL नीलामी में जडेजा को खरीदा. यहां से जडेजा का करियर संवरने लगा, वह एक बेहतर गेंदबाज बनते गए और साथ ही बल्ले से भी अपनी उपयोगिता साबित करने लगे. विकेट के पीछे से धोनी इस युवा स्पिनर को अलग-अलग बल्लेबाजों के खिलाफ खास गेंद डालने का निर्देश देते और उसका असर दिखता भी था. 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में बल्ले और गेंद से कमाल कर जडेजा ने भारत को खिताब दिलाने में खास भूमिका अदा की.

अश्विन के साथ मिलकर जमा चुके रंग

2013 में टेस्ट डेब्यू करने वाले जडेजा ने इसके बाद रविचंद्रन अश्विन के साथ मिलकर एक ऐसी स्पिन जोड़ी बनाई, जिसने आने वाले सालों में भारतीय जमीन पर विदेशी टीमों का टिक पाना दूभर कर दिया. इसका ही नतीजा है कि भारत ने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद से मुश्किल से 3 टेस्ट मैच ही हारे हैं. इसमें जडेजा-अश्विन की स्पिन जोड़ी और उनकी बल्लेबाजी का भी अहम योगदान रहा है.

नंबर 1 ऑलराउंडर, बेस्ट फील्डर

पिछले करीब 3 साल में जडेजा ने बल्ले से अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार किया है और 2021 में दुनिया के नंबर एक टेस्ट ऑलराउंडर बने. वहीं फील्डिंग में वह संभवतया इस वक्त दुनिया में नंबर एक हैं. वैसे जडेजा इन दोनों मोर्चों पर पहले से ही अच्छे थे. जडेजा के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सौराष्ट्र के लिए 3 तिहरे शतक हैं.

जडेजा ने भारत के लिए अभी तक 60 टेस्ट मैचों में 242 विकेट हासिल किए हैं, जबकि 3 शतकों की मदद से ढाई हजार रन भी बनाए हैं. इसी तरह वनडे में उन्होंने 171 मैचों में 189 विकेट और 2447 रन बनाए हैं. वहीं 64 टी20 मैचों में जडेजा के खाते में 51 विकेट और 457 रन हैं.

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