पहली बार 10 साल में मैंने 1 महीने बैट नहीं छुआ, विराट कोहली ने ब्रेक लेने की वजह का किया खुलासा

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विराट कोहली ब्रेक के बाद एशिया कप 2022 में मैदान पर लौटेंगे, जहां टीम 28 अगस्त (रविवार) को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी। कोहली को भारत के वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के पिछले दो दौरों के लिए आराम दिया गया था। पिछले कुछ महीनों से उनका फॉर्म खराब चल रहा है। भारत के पूर्व कप्तान का लक्ष्य टूर्नामेंट में मजबूत वापसी करने पर होगी। इस बीच उन्होंने ब्रेक लेने के कारण का खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि वह मानसिक रूप से ठीक महसूस नहीं कर रहे थे। 10 साल में पहली बार उन्होंने 1 महीने तक बल्ले को हाथ नहीं लगाया।

कोहली को उनकी आक्रामकता के लिए जाने जाते हैं। 33 वर्षीय स्टार की कप्तानी में टीम इंडिया ने इसी शैली में क्रिकेट खेला और सफलता भी मिली। अब उन्होंने अब अपने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि वह थका हुआ महसूस कर रहे थे। मनसिक, भावनात्मक और शारीरिक तौर पर उन्हें इसका असर देखने को मिल रहा था।

स्टार स्पोर्ट्स ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें विराट ब्रेक लेने की वजह के बारे में बता रहे हैं। उन्होंने कहा, “10 साल में पहली बार मैंने एक महीने तक अपने बल्ले को नहीं छुआ। मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी इंटेंसिटी को लेकर अपने आप से झूठ बोलने की कोशिश कर रहा था। मैं अपने आप मनाने की कोशिश कर रहा था कि मुझमें इंटेंसिटी है। लेकिन शरीर आपको रुकने के लिए कह रहा था। मेरा मन मुझसे ब्रेक लेने और पीछे हटने को कह रहा था।”

कोहली ने आगे कहा, “मुझे एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है, जो मानसिक रूप से बहुत मजबूत है और मैं हूं। लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है और आपको उस सीमा को पहचानने की जरूरत है। नहीं तो चीजें आपके लिए काफी खराब हो सकती हैं। इस समय ने मुझे बहुत कुछ सिखाया, जिन्हें मैं समझ नहीं रहा था। जब वो सामने आए तो उसे मैंने स्वीकार किया।”

कोहली ने आगे मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात की। उन्होंने कहा “मुझे यह स्वीकार करने में कोई शर्म नहीं है कि मैं मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रहा था। यह महसूस करना एक बहुत ही सामान्य बात है, लेकिन हम बोलते नहीं हैं। हम मानसिक रूप से कमजोर नहीं दिखना चाहते। मेरा विश्वास करें, मजबूत होने का ढोंग करना कमजोर होने की बात मान लेने की तुलना में कहीं अधिक बुरा है।”

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